Report : Rahul Bahal
बड़ा सवाल विकासनगर के प्रतिबंधित क्षेत्र में ऐसे कैसे फल फूल गया स्टोन क्रशस का मकड़ जाल?
बड़ा सवाल देश के पहले आसन वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्र की परिधि में स्थापित दर्जनों स्टोन क्रशर का मास्टर माइंड कौन?
बड़ा सवाल पूर्व की सरकारों ने इस विषय के सामने आते ही यहाँ खनन गतिविधियों को प्रतिबंधित किया था तो वर्तमान में यहाँ कैसे संचालित हो रहे क्रशर प्लांट एवं खनन पट्टे?
नैनीताल हाईकोर्ट में विचाराधीन जनहित याचिका संख्या 2023/2025 में पारित 9 जनवरी 2026 के आदेश ने एक बार फिर आसन वैटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व के आसपास संचालित स्टोन क्रशरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताते दें कि देश के पहले आसन वैटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व को 2020 में रामसर स्थल (उच्च पारिस्थितिक मूल्य वाली अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि) घोषित किया गया है जो कि उत्तराखंड का पहला एवं भारत का 38वां रामसर स्थल है।
इस पूरे मामले में जनहित याचिका दायर करने वाले एवं इस क्षेत्र से संबंधित आधिकारिक ईको डेवलपमेंट कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद आरिफ ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि जब आम नागरिक संरक्षित क्षेत्र में कोई गतिविधि नहीं कर सकता, तो फिर स्टोन क्रशरों को संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई? मोहम्मद आरिफ के अनुसार, स्टोन क्रशरों के संचालन से आसन कंजर्वेशन रिजर्व की जैव विविधता, वन्यजीवों और पर्यावरण पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
मोहम्मद आरिफ़ की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने इस मामले में प्रमुख सचिव, जिलाधिकारी सहित संबंधित समस्त विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे कोर्ट को यह स्पष्ट रूप से अवगत कराएं कि क्षेत्र में संचालित सभी स्टोन क्रशरों की दूरी आसान कंजर्वेशन रिजर्व से कितनी है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित क्षेत्र में संचालित 24 स्टोन क्रशरों को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। गौरतलब है कि इससे पूर्व भी वर्ष 2014 में हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर नेशनल पार्क एवं सेंचुरी की 10 किलोमीटर परिधि में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जब प्रतिबंध पहले से लागू है, तो फिर प्रतिबंधित क्षेत्र में खनन गतिविधियों को अनुमति कैसे दी गई? नियमों के अनुसार यदि कोई स्टोन क्रशर नेशनल पार्क या वाइल्डलाइफ सेंचुरी की 10 किमी परिधि में स्थित है, तो खनन कार्य प्रारंभ करने से पहले नेशनल बोर्ड ऑफ वाइल्ड लाइफ (NBWL) की अनुमति तथा पर्यावरणीय स्वीकृति (Environmental Clearance) प्राप्त करना अनिवार्य है। इसके बावजूद क्षेत्र में खनन और स्टोन क्रशर संचालन की अनुमति दिया जाना संदेह के घेरे में है। वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 2(24-क) के अंतर्गत आसन कंजर्वेशन रिजर्व को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। अतिसंवेदनशील ऐसे संरक्षित क्षेत्र में किसी भी प्रकार की गतिविधि को लेकर सख्त नियम लागू होते हैं बावजूद इसके आसन वेटलैंड कंजर्वेशन रिजर्व क्षेत्र अंतर्गत यमुना नदी में ढालीपुर, ढकरानी और भीमावाला में तमाम क्रशर प्लांटस् और खनन पट्टे संचालित किये गये हैं ये बड़ा सवाल बना हुआ है।
अब देखना यह होगा कि संबंधित विभाग हाईकोर्ट के समक्ष क्या जवाब पेश करते हैं और क्या प्रतिबंधित क्षेत्र में चल रही इन गतिविधियों पर वास्तव में कार्रवाई होती है या फिर नियमों की अनदेखी यूँ ही जारी रहती है।