रिपोर्ट : राहुल बहल
हे यमराज अब आप ही अपनी बहन यमुना की रक्षा करो, टमटम बुल्स ही नहीं अब JCB से भी यमुना पर हो रहा पर प्रहार
विकासनगर के नावघाट पुल पर संकट जीरो टॉलरेंस पूरी तरह से फेल उठ रहे सवाल ही सवाल ?
सरकार की लुटिया डुबो रही रिवर बैड कंपनी और खनन विभाग
100 मीटर प्रतिबंध के बावजूद पुल के आसपास धड़ल्ले से चल रही खनन गतिविधियां, आखिर सिंडिकेट के आगे क्यों नतमस्तक है सिस्टम ?
विकासनगर भीमावाला के नावघाट पुल पर खनन विभाग द्वारा चेतावनी बोर्ड लगाया गया है, जिसमें साफ लिखा है कि पुल के दोनों ओर 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि प्रतिबंधित है और उल्लंघन करने वालों पर कानूनी कार्यवाई होगी।
लेकिन जमीनी हकीकत सरकारी दावों और “जीरो टॉलरेंस” नीति की पोल खोलती नजर आ रही है।
पुल के आसपास खुलेआम खनन गतिविधि जारी है। कई स्थानों पर पुल के पिलरों की जड़ों तक खुदाई होने से संरचना की सुरक्षा पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। सवाल यह है कि जब प्रतिबंध स्पष्ट है तो आखिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? विभाग की सख्ती फिलहाल सिर्फ बोर्ड तक सीमित दिखाई दे रही है।
प्रतिबंधित क्षेत्र में जेसीबी, टमटम और बुल्स जैसे वाहन बेखौफ नदी में उतर रहे हैं। अब यह सवाल भी खड़ा हो रहा है कि इन वाहनों को नदी में संचालन की अनुमति किस आधार पर मिली? क्या खनन विभाग और परिवहन विभाग से आवश्यक परमिशन ली गई है या फिर सब कुछ मिलीभगत से चल रहा है?
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami लगातार “जीरो टॉलरेंस” की बात करते हैं, लेकिन भीमावाला क्षेत्र में पुल के बेहद करीब जारी खनन गतिविधियां उस दावे को खुली चुनौती देती नजर आ रही हैं। स्थानीय लोगों में डर है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या चेतावनी बोर्ड सिर्फ खानापूर्ति के लिए लगाए गए हैं, या फिर जिम्मेदार विभाग सच में अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करने का साहस दिखाएंगे?